नवरात्री में ही गरबा क्यों खेला जाता है? गरबा की शुरुआत और उसका महत्व

नवरात्रि में गरबा का महत्व: क्योंकि यह गुजरात से आया है और एक पारंपरिक व सांस्कृतिक नृत्य है। नवरात्रि पर गरबा खेलने की परंपरा का इतिहास कई हजारों साल पुराना है। भारत में गरबा गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में आज से पहले भी खेला जाता था, लेकिन इसकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ती गई। दीप और कर्म दो शब्द से मिलकर बना हैं जिसे गरबा कहा जाता है।

गरबे का क्या अर्थ है:– माता के गर्भ में शिशु का जीवन ही गरबा का अर्थ है।

महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर माता शक्ति के सामने नृत्य कर उन्हें खुश करती हैं जब दीप गर्भ की स्थापना होती है। आपको बता दें कि दीप गर्भ नारी की सृजनशक्ति का प्रतीक है, और गरबा इसी शक्ति का अपभ्रंश रूप है। इस तरह से यह परंपरा विकसित हुई और आज सभी राज्यों में नवरात्री पर्व पर गरबा का आयोजन किया जाता है। साथ ही, कई स्थानों पर गरबा प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, जिसमें कई आकर्षक इनाम रखे जाते हैं।

गरबा नृत्य प्रजनन क्षमता, नारीत्व और मातृ देवियों के सभी नौ रूपों का सम्मान करता है। गुजरात और राजस्थान ही नहीं, देश भर में गरबा खेला जाता है। भारत के कई हिस्सों में, खासकर तमिलनाडु (दक्षिण-पूर्व) और गुजरात (उत्तर-पूर्वी) के पड़ोसी राजस्थान में, गरबा के साथ-साथ ऐसे अन्य लोक नृत्य भी देखे जाते हैं।

महिलाये भक्त गरबा करते समय रंगीन पोशाक पहनते हैं, जैसे झुमके, चूड़ियां, हार आदि। पुरुष सिर पर एक पगड़ी और घुटनों के ऊपर एक छोटा गोल कुर्ता वाला कफनी पायजामा पहनते हैं। भारतीय संस्कृति का एक सांस्कृतिक नृत्य है, गरबा। यह नृत्य भी खुशी और उत्साह का प्रतीक है।

कैसे गरबा खेलते हैं?

नृत्य करने वाले सभी लोग गोले में गरबा करते हैं, जो जीवन के गोल चक्र को दर्शाता है। गरबा नृत्य में कई तरह की चीजें शामिल हैं। पुरुष और महिलाएं गरबे में ताली, चुटकी, डांडिया और मंजीर का उपयोग करते हैं। गरबे के नृत्य में मातृशक्ति और कृष्ण की रासलीला से संबंधित गीत गाए और बजाए जाते हैं। गुजरात के लोगों का मानना है कि गरबा माता को बहुत प्रिय है, इसलिए हर साल गरबा नवरात्रि में ही मनाया जाता है।

गरबा कितने प्रकार का होता हैं?

अलग-अलग गुजराती नृत्य रूपों को गरबा के लोक नृत्य कार्यक्रमों में दिखाया जाता है। चुटकी, ताली और घुमाव इन रूपों में से हैं। गुजराती में ताली गरबा और त्रान ताली गरबा दो प्रकार के नृत्य होते हैं। नर्तक सभी प्रकार की सतहों पर गरबा करते हैं इससे नंगे पैर करना अनिवार्य है। हिंदू धर्म के अनुसार, नंगे पैर गरबा करना आपको धरती माता और माँ दुर्गा के सभी सवरूप से जोड़ता है।

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